Sunday, March 3, 2024
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ब‍िना जातीय समीकरण के इस लोकसभा सीट पर जीत है बहुत मश्‍क‍िल, यहां से म‍िले 2 मुख्‍यमंत्री और केन्‍द्रीय मंत्री

छत्तीसगढ़ की दुर्ग लोकसभा की सीट अकेली ऐसी सीट है, जिसके तहत आने वाली विधानसभा सीटों ने एक नहीं दो-दो मुख्यमंत्री दिए हैं. मोतीलाल वोरा अविभाजित मध्यप्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री बने, जबकि भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के पांच साल तक मुख्यमंत्री रहे हैं. बघेल इस लोकसभा के तहत आने वाली पाटन विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. वर्ष 2018 से 2023 तक वे राज्य के मुख्यमंत्री रहे, जबकि मोतीलाल वोरा पहली वर्ष 1985 में राज्य के मुख्यमंत्री बने. वर्ष 1989 में उन्हें दोबारा राज्य का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. मोतीलाल वोरा कांग्रेस के कोषाध्यक्ष भी रहे. वे अविभाजित उत्तर प्रदेश के राज्य के राज्यपाल और केंद्र में मंत्री भी बने. लेकिन मोतीलाल वोरा ने दुर्ग से लोकसभा का चुनाव कभी नहीं लड़ा. उन्हें राज्यसभा में भेजकर केंद्र में मंत्री बनाया गया. एक बार वे राजनांदगांव से लोकसभा का चुनाव लड़े थे.

कांग्रेस विरोधी लहर में ताम्रध्वज साहू ने जीता चुनाव
दुर्ग लोकसभा सीट की राजनीति साहू-कुर्मी समाज के बीच देखने को मिलती है. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में चली कांग्रेस विरोधी लहर में ताम्रध्वज साहू चुनाव जीतने में सफल रहे थे. उन्होंने भाजपा के बहुचर्चित चेहरे सरोज पांडेय को हराया था. ताम्रध्वज साहू 2018 का विधानसभा चुनाव जीतकर भूपेश बघेल मंत्रिमंडल में गृह मंत्री बन गए. 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रतिमा चंद्राकर कांग्रेस की उम्मीदवार थीं. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर में भाजपा के विजय बघेल से चुनाव हार गईं. इस संसदीय सीट पर जातीय समीकरण के साथ-साथ नेताओं की आपसी रिश्तेदारी के चलते चुनाव के वक्त यह अनुमान लगाना कठिन होता है कि कौन अपने दल के उम्मीदवार के साथ है और कौन खिलाफ काम कर रहा है. विजय बघेल का जब प्रतिभा चंद्राकर से मुकाबला हुआ तो रिश्ता मुंह बोले भाई-बहन का सामने आया. पिछले लोकसभा चुनाव में चुनाव जीते विजय बघेल,पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भतीजे हैं. भतीजे को इस बार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने चाचा भूपेश बघेल के खिलाफ पाटन विधानसभा क्षेत्र के मैदान में उतारा था. भतीजा चुनाव हार गया.

कांग्रेस की मजबूत सीट पर कब्जा जमाती भाजपा
दुर्ग लोकसभा सीट पर 1996 के बाद से ही बीजेपी कब्जा रहा था. इस सीट पर कांग्रेस कुल मिलाकर 10 बार लोकसभा सीट जीतने में कामयाब रही है. छह बार भाजपा अपना उम्मीदवार जीताने में सफल रही है. इस क्षेत्र से पांच बार सांसद रहे चंदूलाल चंद्राकर केंद्र में मंत्री भी रहे. वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे. जानेमाने पत्रकार थे. हिन्दुस्तान टाइम्स समूह के अखबार में संपादक भी रहे. भूपेश बघेल की सरकार ने स्वर्गीय चंद्राकर के नाम पर पुरस्कार भी घोषित किए हैं. चंद्राकर कुर्मी समाज से थे. इस लोकसभा सीट पर कुर्मी राजनीतिक तौर पर ज्यादा सजग हैं.  इस लोकसभा क्षेत्र में इसमें 9 विधानसभा क्षेत्र शामिल है. ये दुर्ग शहर, दुर्ग ग्रामीण, भिलाई नगर, वैशाली नगर, पाटन, अहिवारा, नवागढ़, बेमेतरा व साजा है. दो सीट नवागढ़ व अहिवारा आरक्षित श्रेणी में हैं.

साहू-कुर्मी की सियासत में बनते बिगड़ते हैं समीकरण
दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में जातिगत समीकरणों को देखा जाए  सबसे बड़ी आबादी साहू समाज की है. तीस से पैंतीस प्रतिशत वोटर इसी समाज से हैं. कुर्मी वोटर लगभग 22 प्रतिशत हैं. ऐसे में पंद्रह प्रतिशत यादव और सतनामी समाज मिलकर कई बार लोगों के अनुमानों को गलत साबित कर देते हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही उम्मीदवार कुर्मी समाज से थे. भाजपा के विजय बघेल और कांग्रेस से प्रतिमा चंद्राकर. चुनाव जीती भाजपा. कांग्रेस उम्मीदवार प्रतिभा चंद्राकर,चंदूलाल चंद्राकर के परिवार से हैं. उनके पिता वासुदेव चंद्राकर विधायक थे. सहकारिता क्षेत्र का जाना माना चेहरा थे. मोतीलाल वोरा के विरोध की राजनीति हमेशा की. इस क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही को चुनाव के समय गुटबाजी का सामना करना पड़ता है. भाजपा में सरोज पांडे के अलावा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता प्रेम प्रकाश पांडे का भी गुट है. 2014 के लोकसभा चुनाव में सरोज पांडेय के सामने कांग्रेस के स्थानीय प्रत्याशी ताम्रध्वज साहू भारी पड़े थे. कांग्रेस ने जिले के जातिगत समीकरणों के आधार पर ताम्रध्वज साहू को टिकट देते हुए भाजपा के 30 वर्षो के गढ़ को भेदते हुए करीब 16 हजार 848 वोटों से जीत दर्ज की थी.

दुर्ग के पहले सांसद किरोलीकर को याद करती है पुरानी पीढ़ी
आजादी के बाद इस क्षेत्र में हुए पहले लोकसभा चुनाव में वासुदेव श्रीधर किरोलीकर निर्वाचित हुए थे. क्षेत्र में उनके सिद्धांतों का उदाहरण आज भी किसी न किसी रूप में सामने आ जाता है. पहली बार निर्वाचित होने के बाद किरोलीकर जब दिल्ली गए थे तब उनका परिवार भी जिद कर साथ गया था. लेकिन,ट्रेन में परिवार ने सामान्य दर्जे में ही यात्रा की थी. किरोलीकर ने सरकार की तरफ से उपलब्ध कराए गए पास के आधार पर वीआईपी सीट पर सफर किया. जब उनसे पूछा गया कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, तब उन्होंने कहा था यदि मैं ही सरकारी नियमों को तोड़ने लगेंगे, तो फिर दूसरे से कैसे उम्मीद करुंगा. दूसरे लोकसभा चुनाव में किरोलीकर ने टिकट ठुकरा दी. उन्होंने कहा कि वे ही दोबारा चुनाव लड़ेगे तो दूसरे नेताओं को मौका कैसे मिलेगा? इसके बाद मोहन लाल बाकलीवाल को टिकट दिया. किरोलीकर वकील भी थे. किरोलीकर को दुर्ग के अधिवक्ता आदर्श मानते हैं. वे बार काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे. उनकी एक फोटो जिला बार रूम में लगाई गई है. नए अधिवक्ता को उनके बारे में बताया जाता है, कि कैसे एक अधिवक्ता क्रांतिकारी बने. उन्होंने पहले आजादी में अपना योगदान दिया.

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दुर्ग के सांसद विजय बघेल

विजय बघेल की संपत्ति को लेकर उठा था विवाद
दुर्ग के सांसद विजय बघेल की दावेदारी पर ज्यादा संशय नहीं है. उनका राजनीतिक कैरियर हार-जीत में चढ़ता-उतरता रहता है. बड़ी संपत्ति के मालिक भी नहीं है. जो जमीन है उससे बड़ी आय नहीं होती. पिछले चुनाव में उनके द्वारा दी गई जानकारी में करीब एक करोड़ 51 लाख 93 हजार की संपत्ति बताई गई. उसमें से 1 लाख 37 हजार 946 रुपए उनके खुद के पास नगद थे. उनके पास महिंद्रा एसयूवी के अलावा एक जेसीबी व दो लोडर है. इसकी कीमत 69 लाख 53 हजार 297 रुपए है.

बघेल की पत्नी के पास 6 लाख 68 हजार 830 रुपए नगद बताए गए थे. उनके गृह ग्राम उरला में 30 लाख कीमत की पैतृक जमीन है. रायपुर में उनके नाम पर 10 लाख कीमत का मकान है. उनकी पत्नी के नाम पर भी 35 लाख का रायपुर में मकान है. पत्नी पर भी लाखों की देनदारी है. बघेल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक उन्हें बैंकों को क्रमश: 20 लाख 37 हजार 406 रुपए व 32 लाख 74 हजार 975 चुकाना है. बघेल द्वारा दी गई जानकारी में पत्नी पर कर्ज का 34 लाख का कर्ज बताया गया.  कांग्रेस बघेल पर संपत्ति छुपाने का आरोप लगाती रही है. लेकिन,कभी प्रमाणित नहीं कर पाई.

पिछले पांच चुनावों के परिणाम

वर्ष 1999 लोकसभा परिणाम
ताराचंद्र साहू (जीते)- भाजपा-  389777
प्रदीप चौबे-   कांग्रेस –  345259

वर्ष 2004 लोकसभा परिणाम
ताराचंद साहू (जीते)       बीजेपी     382757
भूपेश बघेल            कांग्रेस    321289

वर्ष 2009 लोकसभा परिणाम
सरोज पांडे (जीते)       बीजेपी     283170
प्रदीप चौबे           कांग्रेस     273216

वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव परिणाम
ताम्रध्वज साहू(जीते)       कांग्रेस    570687
सरोज पांडे              बीजेपी   553839

वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव परिणाम
विजय बघेल (जीते)   भाजपा      849374
प्रतिमा चंद्राकर   कांग्रेस       457396

Tags: Durg news, Loksabha Elections

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