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लगभग 5 सालों से देसी गाय और भैंस के दूध से देसी खोवा तैयार कर रहे हैं, जिसकी डिमांड अब सरगुजा सहित बनारस में भी होने लगा है. गंगा यादव के यहां देसी खोवा देसी गाय के दूध और भैंस के दूध से तैयार होता है.
देशी खोवा
हाइलाइट्स
- गंगा यादव ने देसी खोवा बनाकर अपनी जिंदगी बदली.
- सरगुजा और बनारस में देसी खोवा की डिमांड बढ़ी.
- शुद्धता और स्वाद के कारण लोग इसे पसंद करते हैं.
अम्बिकापुर:- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में देशी खोवा ने युवक की जिंदगी बदल दी है. अंबिकापुर सहित बनारस तक लोग इनके खोवा का स्वाद लेते हैं. दरअसल युवक गंगा यादव एक ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखते हैं और लगभग 5 सालों से देसी गाय और भैंस के दूध से देसी खोवा तैयार कर रहे हैं, जिसकी डिमांड अब सरगुजा सहित बनारस में भी होने लगा है. गंगा यादव के यहां देसी खोवा देसी गाय के दूध और भैंस के दूध से तैयार होता है और यह रोजाना 10 से 15 किलो खोवा तैयार करते हैं, जो खाने में खूब स्वादिष्ट है.
वज़ह किसी तकनीकी गैस का उपयोग नहीं होता, बल्कि आग की लकड़ी से तैयार होता है. यही वजह है कि लोग इस खोवा को एक बार खाने के बाद वापस जरूर लौटकर खोवा लेने आते हैं और खोवा बनाने वाले गंगा यादव की तारीफ भी किया करते हैं. ऐसे में गंगा यादव आखिर देसी खोवा तैयार कैसे करते हैं, आइए समझते हैं.
कई इलाकों में इस देसी खोवा की डिमांड
लोकल 18 की टीम ने देसी खोवा से सरगुजा में अपनी पहचान बनाने वाले गंगा यादव से बातचीत किया, तो गंगा यादव ने बताया कि उनके यहां देसी गाय और भैंस के दूध से खोवा तैयार होता है और 5 साल से बनते आ रहे हैं. इस देसी खोवा की डिमांड बढ़ने लगी है. अंबिकापुर के कई इलाकों में इस देसी खोवा की डिमांड है. वहीं कभी अगर यह खोवा नहीं बिकता, तो बनारस भेजा जाता है. खोवा बनाकर उनके जीवन में अच्छा खासा बदलाव अब देखने को मिल रहा है. 10 से 15 किलो ताजा देशी खोवा रोजाना तैयार होता है. बिक्री अच्छा होने की वजह से जिंदगी जीने में गंगा यादव को खूब मजा आ रहा है और चाव के साथ खोवा बनाने लगे हैं.
देहात में गाय और भैंस के दूध इकट्ठा
गंगा यादव Local 18 को बताते हैं कि देसी खोवा तैयार करने से पहले वह गांव देहात में गाय और भैंस के दूध इकट्ठा करते हैं. इकट्ठा करने के बाद दूध को कढ़ाई में डालकर गर्म करते हैं और गर्म करने के बाद धीरे-धीरे कढ़ाई में दूध सट जाता है. देसी स्वादिष्ट खोवा तैयार होता है. उन्होंने खुद अपनी जुबानी कहा कि मेहनत खूब लगता है. यही वजह है कि उनका नाम अब सरगुजा में खोवा मैन के रूप में लोग जानने लगे हैं.
गंगा यादव सपनादर के निवासी हैं और सपनादर सहित अलग-अलग इलाकों से दूध इकट्ठा करने के बाद घर में घरेलू चूल्हे की मदद से खोवा बनाते हैं. खास बात खोवा में किसी प्रकार का कोई मिलावट व केमिकल नहीं डाला जाता है. शुद्ध गाय और भैंस के दूध से मिलकर यह तैयार हो रहा है और छत्तीसगढ़ के बाहर यानी बनारस में इस खोवा की डिमांड बहुत ज्यादा है.