Last Updated:
Capsicum Farming: शिमला मिर्च की खेती से किसानों का जीवन बदल रहा है. उद्यानिकी विभाग की मदद से पॉलीहाउस में इसे उगाया जा रहा है. इस खेती से मोटे मुनाफे के साथ लंबे समय तक आवक होती रहती है.
शिमला मिर्च खेती
हाइलाइट्स
- जिले में शिमला मिर्च की खेती से किसान हो रहे हैं आत्मनिर्भर
- बोरतलाव और रूवातला में शिमला मिर्च की खेती से अच्छी कमाई
- उद्यानिकी विभाग के सहयोग से पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती
राजनांदगांव. जिले में बड़े पैमाने पर किसान शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं और इससे आत्मनिर्भर बन रहे हैं. बोरतलाव, रूवातला और अन्य क्षेत्रों में किसान शिमला मिर्च की खेती से अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं.
किसानों को हो रहा अच्छा मुनाफा
वर्तमान में किसान धान के अलावा सब्जियों और फलों की खेती भी कर रहे हैं. उद्यानिकी विभाग के सहयोग से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शिमला मिर्च की खेती की जा रही है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है. बोरतलाव, रूवातला, पेंड्री और अन्य क्षेत्रों में किसान शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं.
एकड़ के पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती
रूवातला के किसान सोहन साहू और पेंड्री के किसान मोरध्वज ने बताया कि उन्होंने उद्यानिकी विभाग के सहयोग से एक-एक एकड़ के पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती की है और उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है. उन्होंने बताया कि 1 एकड़ खेत में पॉलीहाउस लगाया है, जिसमें कलर शिमला मिर्च के लगभग 12000 पौधे लगाए गए हैं. एक पौधे में लगभग 3 किलो शिमला मिर्च का उत्पादन होता है. मार्केट में यह 100 से 150 रुपए प्रति किलो बिकता है, जिससे अच्छी कमाई हो रही है.
9 से 10 महीने तक चलेगी खेती
किसानों ने बाहर से मिट्टी मंगवाकर बेड बनाया और मल्चिंग के साथ ड्रिप सिस्टम भी लगाया है. रिजवान बचटा किस्म की यह शिमला मिर्च की खेती लगभग 9 से 10 महीने तक चलेगी, जिससे अच्छा मुनाफा होगा.
एक बार शिमला मिर्च लगाने से कई महीनों तक होती है आवक
किसान एक बार शिमला मिर्च लगाने से कई महीनों तक इसकी आवक होती रहती है. शिमला मिर्च की बिक्री से किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. जिले में बड़े पैमाने पर इसे लगाया गया है और इससे अच्छी कमाई हो रही है. पारंपरिक खेती छोड़कर किसान अब शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं और इसे शहर और आसपास के मार्केट में भेज रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छा दाम मिल रहा है. इससे वे सालाना लाखों रुपए कमा रहे हैं और अन्य किसानों को भी इसकी खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं.