Home उत्तर प्रदेश नोएडा-ग्रेटर नोएडा किडनी कांड की जांच नोएडा पहुंची : क्राइम ब्रांच ने CMO ऑफिस में खंगाले रिकॉर्ड, 4 नामी अस्पताल रडार पर

किडनी कांड की जांच नोएडा पहुंची : क्राइम ब्रांच ने CMO ऑफिस में खंगाले रिकॉर्ड, 4 नामी अस्पताल रडार पर

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किडनी कांड की जांच नोएडा पहुंची : क्राइम ब्रांच ने CMO ऑफिस में खंगाले रिकॉर्ड, 4 नामी अस्पताल रडार पर

क्राइम ब्रांच ने CMO ऑफिस में खंगाले रिकॉर्ड, 4 नामी अस्पताल रडार पर

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Noida News : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने पिछले दिनों अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट के आरोप में सात आरोपियों को गिफ्तार किया था। इस मामले में आरोपियों से पूछताछ करने पर नोएडा के कई नामी अस्पतालों का भी इस गोरखधंधे में नाम सामने आया था। अब इस मामले में क्राइम ब्रांच टीम नोएडा पहुंची है। टीम ने सेक्टर 39 स्थित सीएमओ ऑफिस में रिकार्ड खंगाले हैं। टीम ने किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति से जुड़े रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं। साथ ही जिला स्तरीय अंग प्रत्यारोपण समिति के फैसले भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

इन नामी अस्पतालों की बढ़ेगी मुश्किलें 

क्राइम ब्रांच टीम वर्ष 2022 से अब तक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दी गई सभी अनुमतियों की जांच कर रही है।  इनमें गौतमबुद्ध नगर के यथार्थ अस्पताल के अलावा फोर्टिस अस्पताल, जेपी और प्राइमाकेयर सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में हुए ट्रांसप्लांट के मामले शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सीएमओ की तरफ से टीम को किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसमें मरीज और डोनर के दस्तावेज और मेडिकल हिस्ट्री भी शामिल है। वहीं, सीएमओ डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि जिला स्तरीय अंग प्रत्यारोपण समिति के सामने जो रिकॉर्ड आते हैं। उनकी जांच के बाद ही किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति दी जाती है। 

119 मामलों में कमेटी ने दी अनुमति 

सीएमओ ने बताया गया है कि  दिल्ली पुलिस की जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है। हालांकि सीएमओ ने इस मामले में किसी भी तरह की विभागीय जांच शुरू करने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, बताया जा रहा है कि 2022 से अब तक 119 मामलों में कमेटी की ओर से अनुमति दी गई। इनमें से कितने किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े हैं। 

सीएमओ की अध्यक्षता में होता है फैसला 

वर्ष 2018 के शासनादेश के बाद सीएमओ की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अंग प्रत्यारोपण कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी में सीएमओ के अलावा स्वास्थ्य विभाग, एनजीओ, निजी अस्पताल के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। कमेटी कैमरे के सामने मरीज और डोनर दोनों से बात करती है और जरूरी दस्तावेजों की जांच कर प्रत्यारोपण की अनुमति देती है। भविष्य के लिए साक्ष्य के तौर पर वीडियो रिकॉर्डिंग भी रखी जाती है। वर्ष 2018 से पहले यह कमेटी डीएम की अध्यक्षता में काम करती थी। 

वर्ष 2021 में नोएडा में सामने आया था मामला 

वर्ष 2021 में नोएडा में किडनी ट्रांसप्लांट का मामला सामने आया था। तब स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई की गई थी। वहीं, नया मामला सामने आने के बाद वर्ष 2018 के बाद दी गई ट्रांसप्लांट अनुमति की जांच की मांग शुरू हो गई है।

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