Saturday, April 13, 2024
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Lok Sabha Elections 2024: मध्य प्रदेश में मंदिर आंदोलन ने बढ़ाई BJP की ताकत, क्या इस बार मिलेगी और भी बड़ी जीत


लोकसभा चुनावों में भाजपा की स्थिति
– फोटो : अमर उजाला

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भाजपा और उसके नेता कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में मध्य प्रदेश है और मध्य प्रदेश के मन में मोदी हैं। यह बात पिछले दो लोकसभा चुनावों के परिणामों में साफ झलकती है। इसके अलावा एक और बड़ा फैक्टर है, जिसने भाजपा को मध्य प्रदेश में अपनी ताकत बढ़ाने में मदद की है। वह फैक्टर है- अयोध्या में भगवान श्री राम के मंदिर को चला आंदोलन। 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन ने जैसे-जैसे गति पकड़ी, भाजपा ने मध्य प्रदेश में अपनी नींव को मजबूत ही किया है। इस बार खास बात यह है कि 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है। ऐसे में भाजपा 29 में से सभी 29 सीटों पर जीत हासिल करने का दावा कर रही है। आंकड़े भी कुछ ऐसे हैं कि भाजपा के दावे को हल्के में नहीं लिया जा सकता। 

2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 2018 के मुकाबले 7.53 फीसदी बढ़ा। सीटों की संख्या भी 109 से बढ़कर 163 पर पहुंच गई। वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर 2018 के मुकाबले 0.49 फीसदी घट गया। सीटें 114 के मुकाबले 66 ही रह गईं। 2018 के मुकाबले कांग्रेस को 48 सीटों का नुकसान हुआ है। 2018 में भाजपा को 41.02 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत। इसी तरह 2023 में भाजपा को 48.55 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 40.40 प्रतिशत। हालांकि, जब बात लोकसभा चुनावों की बात आती है तो 2019 में भाजपा ने 58 प्रतिशत वोट हासिल कर चुनौती ही खत्म कर दी थी। एकतरफा मुकाबलों में भाजपा ने 29 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की थी। 

राम मंदिर आंदोलन के साथ बढ़ी भाजपा की ताकत

1980 में भाजपा की स्थापना हुई और 1984 का लोकसभा चुनाव पार्टी का राज्य में पहला बड़ा चुनाव था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद संवेदनाओं की लहर पर सवार होकर कांग्रेस ने 57.1 प्रतिशत वोट के साथ राज्य की सभी 40 में से 40 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा को तब 30 प्रतिशत वोट मिले थे। हालांकि, इसके बाद के पांच साल में जैसे-जैसे राम मंदिर आंदोलन ने गति पकड़ी, भाजपा को आधार मिलता गया। 1989 में भाजपा ने 39.7 प्रतिशत वोट के साथ 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस को 37.7 प्रतिशत वोट के साथ सिर्फ आठ सीटें मिली थीं। 1991 में कांग्रेस ने दिल्ली की कुर्सी पर वापसी की, लेकिन भाजपा का वोट नहीं घटा। कांग्रेस ने 45.3 प्रतिशत वोट के साथ 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़कर 41.9 प्रतिशत हुआ था। इसके बाद भी उसे 12 सीटों पर ही जीत मिल सकी थी। 1996 में 41.3 प्रतिशत वोट के साथ 27 सीटें, 1998 में 45.7 प्रतिशत वोट के साथ 30 सीटें और 1999 में भाजपा ने 46.6 प्रतिशत वोट के साथ 29 सीटों पर जीत हासिल की थी। राम मंदिर आंदोलन ही था, जिसके दम पर भाजपा ने 1990 में 312 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 220 पर जीत हासिल की थी। उसका वोट शेयर 46.5 प्रतिशत रहा था। 

2009 को छोड़कर भाजपा ने वर्चस्व बनाए रखा 

2000 में मध्य प्रदेश का विभाजन हुआ और 11 सीटें छत्तीसगढ़ में चली गईं। विभाजित मध्य प्रदेश का पहला लोकसभा चुनाव 2004 में हुआ और भाजपा ने 48.1 प्रतिशत वोट के साथ 25 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस को 34.1 प्रतिशत वोट के साथ चार सीटें ही मिली थीं। 2009 में कांग्रेस ने वापसी की थी। तब कांग्रेस के युवाओं ने जमे-जमाए नेताओं को मात देकर पार्टी के सुनहरे भविष्य के संकेत दिए थे। 29 में से 12 सीटों पर उसने जीत हासिल की थी और उसे 40.1 प्रतिशत वोट मिले थे। भाजपा को 43.4 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 16 सीटें हासिल की थीं। 

मोदी लहर में बढ़ता गया वोट प्रतिशत

2014 में मोदी लहर ऐसी चली कि भाजपा ने 29 में से 27 सीटों पर जीत हासिल की। सिर्फ गुना (ज्योतिरादित्य सिंधिया) और छिंदवाड़ा (कमलनाथ) में ही कांग्रेस को जीत मिली। भाजपा को 54.8 प्रतिशत वोट मिले थे और कांग्रेस को सिर्फ 35.4 प्रतिशत। 2019 में तो लहर और बड़ी हो गई। भाजपा को मिले 58.5 प्रतिशत वोट और 28 सीटें। इस बार गुना में सिंधिया को उनके करीबी रहे केपी यादव ने धूल चटाई थी। छिंदवाड़ा जरूर कांग्रेस का अभेद्य किला बना रहा। कांग्रेस का वोट प्रतिशत रहा 34.8 प्रतिशत। खास बात यह है कि 2018 में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी, लेकिन लोकसभा की बात आते ही भाजपा के वोट प्रतिशत जबरदस्त उछाल आया। 

लोकसभा में बढ़ता है भाजपा का वोट शेयर

1980 के बाद से विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट शेयर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। हालांकि, जब बात लोकसभा चुनावों की आती है तो 1984 के बाद से लगातार बढ़ोतरी ही हुई है। लोकसभा चुनाव के वोट शेयर में उछाल नरेंद्र मोदी की लहर का नतीजा हो सकता है। दिसंबर 2018 से मार्च 2020 के बीच की अवधि को छोड़कर दिसंबर 2003 से मध्य प्रदेश में भाजपा सत्ता में है। 1980 से 2023 के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा के वोट शेयर के विश्लेषण से पता चलता है कि पार्टी ने जिन सीटों पर चुनाव लडा है, वहां उसका वोट शेयर 31.38 प्रतिशत से 48.5 प्रतिशत के बीच रहा है। लोकसभा चुनावों में यह कहानी बिल्कुल अलग हो जाती है। पार्टी का वोट शेयर 1984 के बाद से लगातार बढ़ा है। 1993 में भाजपा को विधानसभा चुनाव में 38.82 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि 1996 के लोकसभा चुनाव में 41.32 प्रतिशत। 2018 के विधानसभा चुनावों में 41.33 प्रतिशत वोट शेयर के बाद पार्टी ने 2019 में ग्राफ ऊंचा किया और कुछ ही महीनों बाद वोट शेयर बढ़कर 58.23 प्रतिशत हो गया। 2014 में भाजपा को 54.76 प्रतिशत वोट मिले थे।

 

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