बीजापुर: सोचिए जहां देश लगातार विकास कर रहा है, वहीं एक ऐसा गांव है, जहां बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है. जी हां, शायद आपको विश्वास नहीं हो कि आजादी के 75 साल बीतने के बाद भी छत्तीसगढ़ का एक गांव अंधेरे में डूबा हुआ था. जहां हम चंद्रमा तक पहुंच चुके हैं, वहीं ये गांव रोशनी के लिए तरस रहा था. हालांकि अब इस गांव को एक खास तोहफा मिला है, जिससे यहां के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं है. आइए जानते हैं सबकुछ…
हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पुसकोंटा गांव की. यहां के लोगों के लिए यह साल यादगार बन गया. इस गांव को विकास का एक अहम तोहफा मिला है, जिससे हर किसी के चेहरे पर खुशी है. उनके चेहरों पर एक नई उम्मीद की झलक दिख रही है. दरअसल, यह गांव विकास की एक नई रोशनी से जगमगा उठा है. यहां के ग्रामीण कई दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे. बरसों तक अंधेरे के साए में रहने वाले गांव में अब सुशासन का सुर्योदय हो चुका है. छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नियद नेल्लानार योजना’ आशा विश्वास और विकास की नई इबारत लिख रही है. इससे नक्सल प्रभावित गांव विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है.
सौरभ की हत्या का मलाल नहीं! जेल में जमकर नाची मुस्कान, आज 14 दिन बाद मिली अपने कातिल प्यार से
हीरापुर ग्राम पंचायत का एक सुदूर गांव पुसकोंटा कभी घने जंगलों, घुमावदार रास्तों और सूर्यास्त के बाद घने अंधेरे के लिए जाना जाता था. अब, यह जगह हर घर में बिजली के बल्बों से जगमगा रही है. जिले के 100 से अधिक गांवों में कभी बिजली नहीं दिखी और सरकार ने हर हफ्ते कम से कम एक गांव में बिजली लाने का फैसला किया है. ‘नियाद नेल्लनार योजना’ के तहत, सरकार ने लंबे समय से चले आ रहे सपनों को हकीकत में बदल दिया है. जब गांव के हर घर में पहली बार बिजली के बल्ब जले, तो यह एक नए युग की शुरुआत थी.
देवा कुंजाम, भीमा मडावी, नागू पोट्टम और जमुना मिच्छा जैसे निवासी अब अपनी आंखों में नई चमक के साथ उम्मीद और बदलाव की बात करते हैं. देवा कुंजाम ने कहा, पहले, अंधेरा इतना घना था कि जंगली जानवरों का डर हमेशा बना रहता था. लेकिन अब, बिजली आने से हम सुरक्षित महसूस करते हैं.
बॉयफ्रेंड था कमरे में, वो थी उसकी बांहों में, तभी बोली- मुर्गा खिलाओगे… कहा- अभी नहीं बाद में, फिर…
गांव की एक महिला जमुना मिच्छा ने कहा, जल जीवन मिशन के तहत पाइप से जलापूर्ति होने से अब हमें पानी के लिए हैंडपंप तक नहीं जाना पड़ता. पहले हमें पानी लाने के लिए अपने बच्चों को घर पर अकेला छोड़ना पड़ता था. अब घर पर ही पानी उपलब्ध होने से हम उनकी बेहतर देखभाल कर सकते हैं.
भीमा मडावी के लिए यह बदलाव और भी महत्वपूर्ण है. अपने जीवन में पहली बार वे रायपुर आए थे. ऐसा अनुभव जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. नियाद नेल्लनार योजना हर गांव को मुख्यधारा के विकास से जोड़ने वाली एक दूरदर्शी पहल है. पुसकोंटा अब सिर्फ रोशनी से कहीं बढ़कर है. यह अवसरों की एक नई सुबह देख रहा है. प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी सुविधाएं गांव में आने लगी हैं.