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जानकारी के अनुसार, परिजनों और ग्रामीणों ने शव को उठाने से इनकार करते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। परिजनों का कहना था कि जब तक आरोपियों के घर नहीं गिराए जाते और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे शव नहीं लेंगे। कई घंटे तक परिजनों ने शव लिया, उसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों व परिजनों ने शहडोल-अनूपपुर हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे। इससे बुधवार देर शाम तक जाम लगा रहा।
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वहीं, मामले की जानकारी लगते ही जिला पंचायत सदस्य मनमोहन चौधरी मौके पर पहुंचे और सड़क जाम कर रहे ग्रामीणों व परिजनों से मुलाकात कर उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए परिजनों ने जिला पंचायत सदस्य को वहां से खदेड़ दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर गुरुवार सुबह से वायरल हो रहा है, जिसमें परिजन जिला पंचायत सदस्य को खदेड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। मौके पर मौजूद अमलाई थाना प्रभारी ने पुलिस कर्मियों को आदेश दिया कि जिला पंचायत सदस्य को मौके से वापस ले जाएं। इसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें वहां से ले गए।
पुलिस ने चार को हिरासत में लिया
पुलिस ने हत्या के आरोप में चार संदेहियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद उनके परिजनों और ग्रामीणों ने अमलाई थाना का घेराव कर दिया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस बिना ठोस सबूत के उनके घरवालों को उठा लाई है। हिरासत में लिए गए लोगों में राम प्रसाद चौधरी, उमेश चौधरी, मूलचंद चौधरी और रमेश चौधरी शामिल हैं। अमलाई थाना प्रभारी जय प्रकाश शर्मा ने बताया कि मामले की जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट होगा। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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